स्टॉक मार्केट For Beginners हिन्दी

 सो..  हैलो every one well-come to market live research.

आज हम 

स्टॉक मार्केट क्या होता  है ?   
और  स्टॉक मार्केट कैसे work करता हैं ?  ये समझेंगे.

तो चलो शुरू करते हैं। 
कोई भी कंपनी को Grow होने के लिए यानि की अपना business बढ़ाने के लिए फंड की यानी की पैसोंकि जरूरत होती हैं।
तो फंड लेने के लिए कंपनी के सामने कई अलग अलग रास्ते होते हैँ।
1. कंपनी  venture capital और angle Investors से पैसे उठा सकती हैं
2. कंपनी बैंका से लोन ले सकती है। और  
3. कंपनी  स्टॉक मार्केट से भी पैसे ले सकती हैं।

तो ये सबी रास्तों से मिलने वाले फंड  को कंपनी दो तरीकों से ले सकती हैँ
1. DEBT Financing  और
2. Equity Financing
1. DEBT Financing यानी की कर्ज लेना
 DEBT finance से लिया हुआ पैसा कुछ टाइम  के बाद उनको वापिस देना होता हैँ और उसके साथ मै उसका  ब्याज यानी interest भी देना होता हैँ।
debt Finance का बेस्ट example हैं बैंक से लिया वाला लोन
जब कंपनी बैंक से लोन लेती हैं तब कंपनी को उस पैसों को ब्याज के साथ वापिस करना पड़ता हैं

और दूसरा तरीका  हैं
2.  Equity Financing
equity financing मैं company किसी angle investor या कोई venture capital या स्टॉक मार्केट से पैसा ले सकती हैं।
तो कंपनी को equity  financing से मिलने वाले पैसों को वापिस नहीं देना होता  या कोई भी  ब्याज नहीं  देना  होता ।

तो आपके मन मे  ये सवाल आया होगा की अगर कंपनी को पैसे के बदले मैं कोई ब्याज भी नहीं देना और पैसे वापिस भी नहीं देना तो investors को क्या मिलेंग ।
equity finance से लिए हुए पैसे को कंपनी investors को कंपनी मैं हिस्सेदारी देती हैं तो इससे कंपनी को found मिलता हैं और investors को कंपनी मैं भागीदारी मिलती हैं ।

तो जब कोई कंपनी स्टॉक मार्केट से पैसे लेती है तो ये equity finance होता हैं । 
स्टॉक मार्केट investors के लिए एक ऐसा platform हैँ जहाँ पर कोई भी invest कर सकता हैँ। और कंपनी मे भागीदार बन सकता हैँ।
चाहे अमीर हो या गरीब। 
स्टॉक मार्केट एक ऐसा platform है की उसके through कंपनी पब्लिक से पैसा ले सकती हैँ।
तो जितने भी कंपनी स्टॉक मार्केट मै रजिस्टर हैँ उन्होंने पब्लिक से फंड उठाया हैँ। और उसके बदले मै कंपनी मे पब्लिक को भागीदारी मिली हैँ। और ऐसी कंपनी को हि पब्लिक कंपनी कहते हैं।

जब कंपनी पहली बर पब्लिक से फंड लेती हैं तो उसे IPO यानी की INITIAL PUBLIC OFFERING कहते हैं।
IPO मै कंपनी लोगोसे पैसे उठती है और इसके बदले मै लोगोंको  कंपनी को हिस्सेदारी मिलती हैं।
IPO मै सीधे कंपनी और investors के बिछ मै ट्रांजेक्शन्स होते हैं।
IPO मै कंपनी पब्लिक से पैसे लेती है। और उसे बदले मे कंपनी पब्लिक को भागीदार बानाती है।

For Example
July 2009 मे Adani Power Company का IPO आया था ।
तो Adani power ने public से 3000 CR उठाये थे और उसके बदले मे investors को कंपनी मे करीब करीब 7% स्टैक यानी की कंपनी की हिस्सेदारी दी थी।
तो आप जितने कंपनी के shears खरीदते हो उतनी कंपनी मे आपको हिस्सेदारी मिलती हैँ।
IPO मे कंपनी Investment बैंक के साथ मिलके shears की Price या price Band फिक्स करती हैँ ।
IPO 3  से 10  दिनों के लिए खुला रहता हैँ।
पेहले 3 दिनों मै investors को कंपनी के shears को subscribe करना पड़ता होता हैँ। और 
उसके बाद shears का allotment होता हैं ।

IPO मै आप सिर्फ कंपनी से shears खरीद सकते हो उसको बेच नहीं सकते ।
shears को बेचने के लिए आपको वो स्टॉक , स्टॉक exchange पर लिस्ट होने तक इंतजार करना पड़ता होता हैँ।
IPO मै shears का allotment होने के कुछ दिन बाद वो स्टॉक स्टॉक exchange पे लिस्ट हो ज्याता है ।
और स्टॉक exchange पे लिस्ट होने के बाद आप उसको स्टॉक exchange पे बेच सकते हो और  जिन  investors को वो shears खरीदने है वो खरीद सकते हैँ और उस कंपनी मै भागीदार बनते हैं। 
जब आप shears को बेचते हो तब उस कंपनी की हिस्सेदारी खरीदनेवाले investor को मिल जाती हैँ।
इस तरहा कंपनी ने IPO मै लिस्ट किये हुए shears स्टॉक Exchange पे एक दूसरे मे exchange होते है।
स्टॉक exchanges पे जो transactions होते है वो investors के बीच होते हैं। उसमे कंपनी शामिल नहीं होती । 

ipo मे जब आप shears खरीदते हो तब सीधे कंपनी से shears खरीदते हो वोही जब आप स्टॉक exchanges से shears खरीदते हो तब आप किसी और investor से shears खरीदते हो। 
यानि की स्टॉक exchange पर पैसे  और् shears investors के बीच exchange होते हैं । 

for Example 
Adani Power की initial public offer यानि की  IPO जुले 2009 मे हो चुका हैं ।
Adani power का ipo 28 , 29 और 30 इन 3 दिनों के लिए खुला था यानि की इन 3 दिनों मे अदानी पॉवरस के shears investors को subscribe करने थे । 
28 जुलाई को अदानी पॉवर के shears की allotment हुई और 3 Aug. को ये स्टॉक स्टॉक exchange पे लिस्ट हो गया । 
अदानी पॉवर का स्टॉक स्टॉक exchange  पे लिस्ट होने के बाद यानि 3 Aug से अदानी पॉवर के shears लोगों के बीच exchange हो रहे हैं । 
स्टॉक exchange shears खरीदने वालों को और बेचने वालों को मिलता हैं । और स्टॉक exchange पर buyer और sellers के बीच shears का लेन देन होता हैं । और ये सारा system online हैं । आप घर बैठे कहीसे भी shears buy ya sell कर सकते हो। 

स्टॉक exchange automatic order मैचिंग system का इस्तेमाल करता हैं । तो जब buyer और seller की Orde मैच हो जाती हैं तब वो transections पूरा हो ज्यात हैं 

अदानी पॉवर ने ipo के जरिए लोगों से फंड उठाया और लोगों को कंपनी के शेयर्स दिए फीर अदानी पॉवर का स्टॉक स्टॉक exchange पे लिस्ट होने के बाद वो शेयर स्टॉक exchange पे लोगों के बीच  ही exchange हो रहे हैं । 

for example 
आप अगर आज अदानी पॉवर के शेयर्स खरीद रहे हो तो आप किसी और investors  से शेयर्स खरीद रहे हो और आपने  शेयर्स खरीदने के लिए जो पैसे invest कीये हो वो पैसे आप जिस investor से शेयर्स खरीद रहे हो उसे मिलते हैं । 
चाहे आप ipo मे शेयर्स खरीदो या स्टॉक exchange पर but शेयर्स खरीदने के लिए आपको पहले किसी स्टॉक brokerage फर्म के पास आपका demat account खोलना होगा कारण स्टॉक मार्केट मैं invest करने के लिए demat account compulsory होता हैं 

स्टॉक brokerage फर्म mediator यानि मधेसत होते हैं  जिनके जरिए आप शेयर्स buy या सेल कर सकते हो 
बदले मैं आपको brokerage फर्म को कुछ charges पे करने होते हैं । 

demat account बैंक saving अककाउंट की तरह ही होता हैं । जैसे saving account मैं पैसे रखे जाते हैं वैसे ही demat account मैं शेयर्स रखे जाते हैं । 
demat account खोलने के लिए कुछ बेसिक document की जरूरत होती हैं 
जैसे की pan कार्ड आधार कार्ड बैंक passbook या cancel cheque। 
demat account खोलने के बाद आप 3 तरिकेसे शेयर्स buy और sell कर सकते हो । 
1. स्टॉक brokerage फर्म के मोबाईल aap से 
2. स्टॉक brokerage फर्म के website के  या software के जरिए 
3. डायरेक्ट स्टॉक exchange को call लगाकर यानि आपको जो भी शेयर्स buy या sell करने हैं ये डायरेक्ट स्टॉक exchange को बोल सकते हो  
और हा demat account ऐसे broker के पास खोले की जिनकी service अच्छी हो और उनका brokerage charges भी कम हो । 
आपको 9.15am से 3.30 pm के बीच मे  ही स्टॉक buy और sell करने होते हैं ।
इंडिया के मुख्य दो स्टॉक exchanges हैं 
nse यानि नैशनल स्टॉक एक्सचेंज 
और 
bse यानि बॉम्बे स्टॉक exchange 
ये दोनों भी exchanges मुंबई मे स्थापित हैं 
nse पे 1600+ कंपनी listed हैं और bse पे 5500+ कंपनी listed हैं। 
तो स्टॉक मार्केट का हाल जानने के लिए इन सारे स्टॉक्स  को ट्रैक करना यानि इन सारे स्टॉक पे नजर रखना मुनकीं नहीं हैं इस लिए index बनाए गए हैं यानि की Sensex और nifty 
Sensex ये bse यानि बॉम्बे स्टॉक exchanges का मुख्य इंडेक्स हैं
Sensex अलग अलग sectors के 30 well establish और अछे ट्रैक रेकॉर्ड वाली company's से बना हैं । 
Sensex की movement इन 30 स्टॉक्स की performance  के ऊपर depend होती हैं । 
वही  nifty nse का मुख्य index हैं । 
nifty मे 50 well establish और अच्छे ट्रैक रेकॉर्ड वाली company's शामिल हैं । 
निफ्टी की movement इन 50 स्टॉक्स की performance के ऊपर depend होती हैं । 

nifty और Sensex मैं शामिल जो  company's है वो लगबग  सारे अलग अलग sectors से  जैसे की Pharma , It  , Energy , telecom , banking , financial services इनसे चुनी गई होती हैं और ये सारी company's अपनी अपनी sectors की leader company's होती हैं। 
इस तरह निफ्टी और सेंसेक्स मैं अलग अलग sectors कवर हो जाते हैं । 
इस लिए निफ्टी और सेंसेक्स का जो performance हैं वोही स्टॉक मार्केट का performance बोल जाता हैं । 
और सारे स्टॉक्स का ट्रैक कीये बिना लोग सेंसेक्स और निफ्टी को देखकर स्टॉक मार्केट का हाल समज लेते हैं 
तो जब निफ्टी और सेंसेक्स बढ़ जाते हैं तब हम बोलते हैं की स्टॉक मार्केट अच्छा चल रहा हैं और जब निफ्टी और Sensex गिर जाते हैं तब हम बोलते हैं की स्टॉक मार्केट खराब perform कर रहा हैं।
स्टॉक मार्केट मैं investment तो हर कोई return  कमाने के लिए ही करता हैं । 

तो हम अभी देखते हैं की स्टॉक मार्केट मैं invest करके investors को किस तरहसे returns  मिलते हैं।
स्टॉक मार्केट मैं invest करनेसे investors को दो तरिकेसे फायदा मिलता हैं । 
एक जो हैं dividend और दूसरा जो हैं  capital appreciation 
कंपनी जब पूरे साल मे होने वाले profits का कुछ हिस्सा आपने शेयर्स होल्डर्स के साथ बाटती है तो उसे dividend बोलते हैं। 
वैसे तो dividend देना कंपनी को compulsory नहीं होता हैं। शेयर्स holder को dividend  देना हैं या नहीं ये पूरी तरह कंपनी के बोर्ड ऑफ directors के ऊपर depend होता हैं । 
वैसे देखेंगे तो हम dividend income पर हम ज्यादा depend नहीं रह सकते हैं । 

वैसे देखा जाए तो छोटी और growth stage वाली कंपनी dividend नहीं देती । वो अपना profit कंपनी की growth मैं ही reinvest करना पसंद करते हैं ।
और 
capital appreciation का मतलब ये हैं की शेयर की price बढ़नेसे आपकी investment value बढ़ जाती हैं । 
मानलों की अगर आपने 3 साल पहले xyz Company का एक शेयर खरीदा था तब उस company के शेयर्स की प्राइस 100 रुपये थी और अभी 180 हो गई हैं तो ये जो 80 रुपये की बढ़त को capital appreciation कहते हैं। 

capital appreciation स्टॉक मार्केट से पेसे कमाने का मैन  source हैं । 
लॉंग टर्म मे शेयर की price कंपनी की growth को follow करती हैं । तो जब कंपनी अच्छा perform करती हैं और कंपनी लगातार growth कर रही होती हैं  तब उसकी मार्केट value बढ़ जाती हैं । 
और उसकी वजहसे उस स्टॉक की प्राइस बढ़ जाती हैं । 

वैसे ही अगर कंपनी जब खराब perform करीत हैं तब उसकी मार्केट value कम हो जाती हैं और उस स्टॉक की शेयर price कम हो जाती हैं । 

तो आपका मैन focus यही रहना चाहिए  की कैसे आप capital appreciation से पैसे कमाए । 
तो उसके लिए आपको अच्छा खासा analysis करना होगा ।
स्टॉक मार्केट analysis के mainly दो प्रकार होते हैं
एक fundamental analysis और दूसरा technical analysis.

ये हम आगे आने वाले topic मैं समझेंगे। 

अगर आपको इस topic पे पूरा विडिओ देखना है तो आप इधर देख सकते हो । 


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